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إله السيف الفوضوي 3994

لعبة الشطرنج +


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***

بعد أن قال ذلك وقف الخالد الشرير العجوز هناك بصمت وهو ينتظر. لم ينطق بكلمة أخرى.

استمر هذا الانتظار لساعات. أخيراً ، ظهر تموج مفاجئ في الفضاء. اهتزت المنطقة بأكملها كالماء. و بعد ذلك بقليل ، بدا أن وعياً قوياً استيقظ من سباته ، يزداد قوةً وقوة.

عندما استيقظ الوعي ، بدت قطع الجسد الخمس العائمة في الفضاء الخارجي وكأنها تُسحب معاً بقوة غامضة. و بدأت تقترب من بعضها البعض قبل أن تتجمع أخيراً في جسد واحد.

لقد كان جسداً متضرراً. حيث كان مغطى بالعديد من الجروح الشنيعة والمروعة. حيث اخترقت جميع أعضائه ، مغطاة بثقوب بحجم الإصبع. قوة غريبة ظلت عالقة في كل جرح.

كانت هذه القوة الغريبة المتبقية هي التي منعت الجسد من التعافي من إصاباته.

"هـ-هل وجـ-وجد الـ-السيـ-السيد طـ-طريقة لأتـ-أتـعافى... " رن صوت في الفضاء الخارجي. و لكن كان اتصالاً من الروح إلا أنه كان ما زال مجزأً. بدا ضعيفاً للغاية.

وقف الخالد الشرير العجوز وذراعاه إلى جانبيه. "في الوقت الحالي ، إنها مجرد فرصة ، أعظم فرصة وجدتها حتى الآن. أما بالنسبة لما إذا كنت ستتعافى بالفعل ، فسنعرف فقط بمجرد أن نحاول. "

توقف الخالد الشرير العجوز. و قال بجدية "ومع ذلك إذا أردنا اغتنام هذه الفرصة ، فنحن بحاجة إلى بذل بعض الجهد. إنه بارع جداً في التخفي. حتى الأباطرة السماوين يجدون صعوبة في العثور عليه. "

"حـ-حتى الأباطرة السماوين... يجدون صعوبة في العثور عليه. إذن يا سيدي ، هـ-هل ما زالت لدينا فرصة... " همست الروح الضعيفة.

عندما سمع ذلك ضحك الخالد الشرير العجوز بصوت عالٍ وقال "عندما يتعلق الأمر بالقتال ، قد لا أتمكن من هزيمة الأباطرة السماوين ، ولكن عندما يتعلق الأمر بالبحث عن الأشخاص ، فلا يوجد إمبراطور سماوي يفوقني في هذا العصر. "

"نعم ، يا سيدي. سأعيد بناء جسدي الآن! " في اللحظة التالية ، أشرق الجسد المجمع بضوء مبهر. انبعثت قوة حياة عظيمة ، مما أحدث هزة في المكان.

تحت الغلاف الضوئي ، أغلقت مناطق التمزق الخمس بسرعة. اندمجت تدريجياً في شكل واحد كامل.

راقب الخالد الشرير العجوز استعادة الشخصية ، وتوقف عند الجروح التي ظلت فيها طاقة غريبة مرات عديدة. ومض شعور عميق بالذنب في قاع عينيه.

في تلك الحرب الشديدة قبل ثلاثة ملايين عام كان يجب أن تكون هذه الإصابات وهذا المصير له ، لكن تلميذه استخدم تقنيته السرية الفطرية في لحظة حرجة لقلب الوضع. و لقد نقل بقوة هذه الإصابات إلى نفسه ، وتحمل كل شيء.

ونتيجة لذلك شعر الخالد الشرير العجوز بمسؤولية عميقة وذنب تجاه تلميذه.

في هذه اللحظة ، عبس الخالد الشرير العجوز. أدار رأسه نحو مسافة بعيدة.

حيث وقعت عيناه ، ظهر رجل عجوز بصمت من العدم. حيث كان يرتدي رداء داوي قديماً وباهتاً. حيث كان وجوده متخفياً ، مما جعله يبدو وكأنه كاهن داوي عادي.

ومع ذلك فإن ظهور الكاهن الداوي جعل الخالد الشرير العجوز يتأهب فوراً كما لو كان يواجه خصماً قوياً.

"فـ-فـ-فــ-فـ-فـ-فــ-فـ-فــ-فـ-فــ-فـ-فـ-فــ-فــ-فـ-فـ-فـ-فــ-فـ-فــ-فــ-فــ-فـ-فــ-فـ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فـ-فـ-فــ-فــ-فــ-فـ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فـ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فـ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فــ-فـ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